Saturday, 11 July 2015

30 जून  2015 को  विश्व भर में मानक के तौर पर मानी जाने वाली लंदन में रखी एटॉमिक घड़ी में 12 बजने से पहले समय एक सेकंड के लिए ठहर गया ! या यूं कहें कि इस घड़ी के अनुसार  दिन 24 घंटे की बजाए 24 घंटे 1 सेकंड का हो गया. लंदन में रखी एटॉमिक घड़ी के एक सेकंड के लिए रुकने के महत्व को इस तथ्य से समझा जा सकता है कि इस अतिसंवेदनशील घड़ी में 1,400,000 वर्षों में 1 सेकंड का अंतर आता है. इसी घड़ी के समय के आधार पर, जिसे यूटीसी या कॉरडिनेटेड यूनिवर्सल टाइम कहा जाता है, विश्वभर की घड़ियों का समय निर्धारित होता है. वैज्ञानिक भाषा में कहें तो 30 जून को धरती के सेकंड में 1 लीप सेकंड या एक अतिरिक्त सेकंड जुड़ गया. साधारणत: एटॉमिक क्लॉक में 23:59:59  के बाद 00:00:00 बजता है, मगर उस दिन  00:00:00 बजने से पहले 23:59:60  बजा यानी  दिन का आखिरी मिनट 60 की बजाए 61 सेकंड का हुआ. ऐसा विश्वभर की घड़ियों को धरती के परिक्रमा के अनुरूप बनाए रखने के लिए किया गया . भारत में १ जुलाई २०१५ को ५.५९.५९ के बाद  ५.५९.६० बजे ! दरअसल हमारी घड़ियों का समय धरती द्वारा अपनी धुरी पर चक्कर लगाने के समय और सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करने में लगने वाले समय के आधार पर निर्धारित होता है. मानक के अनुसार हम आमतौर पर मानते हैं कि एक दिन में 86,400 सेकंड होते हैं लेकिन धरती द्वारा अपनी धुरी पर चक्कर लगाने में 86,400.002 सेकंड लगते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि धरती, चांद और सूर्य के बीच मौजूद गुरुत्वाकर्षण बल के कारण धरती कि गति धीरे-धीरे मंद होते जा रही है. वैज्ञानिकों के अनुसार सन 1820 से औसत सौर दिन, मानक दिन के समय से 2 मिली सेकंड लंबा रहता आ रहा है. सेकंड का 2 हजारवां हिस्सा वैसे तो पलक झपकने भर के समय से भी कम होता है और यह मुश्किल से मापा जा सकता है. लेकिन हर रोज 2 मिली सेकंड जुड़ते-जुड़ते साल भर में इतना अधिक समय हो जाता है कि आज के आधुनिक विश्व में उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. 2012 के बाद यह पहला अवसर होगा जब लीप सेकंड जोड़ा गया . आमतौर पर लीप सेकंड 30 जून या 31 दिसंबर को जोड़ा जाता है. सन 1972 से लीप सेकंड जोड़ने का सिलसिला चलता आ रहा है. क्योंकि लीप सेकंड जोड़ने का निश्चय वैज्ञानिकों द्वारा सूक्ष्म गणना के आधार पर 6 महीने पहले ही लिया जाता है, इसलिए कंप्यूटरो के लिए ऐसा सॉफ्टवेयर तैयार करना मुमकिन नहीं होता जिससे वे स्वत: अपने आप को समय के इस अंतर के अनुसार एडजस्ट कर लें. पिछली बार यानी सन 2012 में लीप सेकंड के कारण लिंकडीन, रेडिट, फोरस्कॉयर जैसी वेबसाइट क्रेश कर गईं थी. लेकिन इस बार ज्यादातर वेबसाइटों ने एहतियाती कदम उठाएं हैं. गूगल ने निश्चय किया था  कि दिन के अंत में एक अतिरिक्त सेकंड जोड़ने की बजाए वह एक सेकंड के कई हिस्से करके  दिनभर नियमित अंतराल पर अपने सर्वर में फीड समय में जोड़ता रहेगा. स्टॉक मार्केट के इस युग में जहां हर सेकंड करोड़ों का करोबार होता है, एक सेकंड का अंतर कई  सारी परेशानियां खड़ी कर सकता है. इसके मद्देनजर विश्वभर के स्टॉक बाजारों ने भी एहतियाती कदम उठाए. अमेरिका में जहां रात 8 बजे लीप सेकंड जुड गया वहीँ  स्टॉक मार्केट 8 बजने से पहले बंद कर दिया गया. न्यूयॉर्क का नैसडैक आज 7:55 मिनट पर बंद कर दिया गया !

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