मृत्यु पूर्वाभास के अद्भुत लक्षण, हिन्दू पुराणों में उल्लिखित इन तरीकों से जान सकते हैं मौत की तारीख
कहते हैं जन्म के साथ ही व्यक्ति का अंत भी निश्चित हो जाता है। उसकी मौत कैसे होगी, कब होगी, कहां होगी आदि सभी का निर्णय पहले ही हो जाता है।लेकिन फिर भी मनुष्य की चिंता इसी बात पर स्थिर रहती है कि कहीं उसे या उसके परिजन को कुछ हो तो नहीं जाएगा। जिस तरह जीवन एक सत्य है उतना ही बड़ा सच है जीवन के पश्चात मौत।लेकिन फिर भी मनुष्य की चिंता इसी बात पर स्थिर रहती है कि कहीं उसे या उसके परिजन को कुछ हो तो नहीं जाएगा। जिस तरह जीवन एक सत्य है उतना ही बड़ा सच है जीवन के पश्चात मौत।व्यक्ति चाहे कितना ही ताकतवर, धनवान या ऊंचे ओहदे पर हो, कभी अपनी मौत को धोखा नहीं दे सकता। इस परिवर्तनशील दुनिया में हर पल व्यक्ति का स्वभाव, उसकी आकांक्षाएं, उसकी प्राथमिकताएं बदलती जा रही हैं और जाहिर है बदलते समय के साथ-साथ इस बदलाव में और भी तेजी आएगी।परंतु जीवन का मौत का चक्र ना कभी बदला है और ना कभी बदलेगा। जिसने जन्म लिया है उसे एक दिन इस भौतिक संसार को अलविदा कहना ही है। हां, मृत्यु के पश्चात आत्मा कहां जाती है, पुनर्जन्म लेकर दोबारा इस संसार का रुख करती है या नहीं, ये अभी एक पहेली ही है।इंसान को कभी नहीं पता चलता कि उसका अंत कितना नजदीक है लेकिन पुराणों के अनुसार भगवान शिव ने स्वयं कुछ ऐसे लक्षणों को बताया है जो मृत्यु के नजदीक होने जैसी बात को स्पष्ट करते हैं।मान्यताओं के अनुसार जब व्यक्ति के चेहरे का रंग पीला, सफेद या हल्का लाल पड़ने लगता है तो ये इस बात का लक्षण है कि 6 महीने के भीतर उसकी मौत निश्चित है।सामान्य तौर पर जब हम तेल या पानी में झांकते हैं तो हमें उसमें अपना अक्स नजर आने लगता है लेकिन जिस व्यक्ति की मौत नजदीक है उसे वह अक्स नजर नहीं आता।पानी और तेल के साथ-साथ शीशे और धूप में भी उसकी परछाई उसका साथ छोड़ जाती है। इसका अर्थ है आगामी 6 महीनों के भीतर उसकी आत्मा उसका शरीर त्याग देगी।मौत से कुछ समय पहले व्यक्ति को सब चीज काली नजर आने लगती है। वह रंगों के बीच अंतर करना बंद कर देता है, उसे सब कुछ काला ही नजर आने लगता है।वैसे इस लक्षण को पुख्ता तौर पर मान्य नहीं कहा जा सकता लेकिन ऐसा माना जाता है कि जिस व्यक्ति का बायां हाथ लगातार एक सप्ताह तक फड़कता रहता है तो यह इस बात को सिद्ध करता है कि एक माह के भीतर उस व्यक्ति की मौत हो जाएगी।मनुष्य के पास पांच सेंस ऑर्गन अर्थात इन्द्रियां होती हैं लेकिन अगर धीरे-धीरे उन इन्द्रियों में कड़ापन आने लगे तो यह उस व्यक्ति की मौत को स्पष्ट करता है।समय जैसे-जैसे बीतता है वह व्यक्ति अपनी नाक को नहीं देख पाता। सामान्य तौर पर धुंधला ही सही लेकिन हम अपनी नाक को देख सकते हैं लेकिन जिस व्यक्ति की मौत होने वाली होती है उसकी आंखें ऊपर की ओर मुड़ने लगती हैं जिसकी वजह से वह अपनी नाक नहीं देख पाता।सामान्य व्यक्ति सूरज, चांद और आग में से निकलने वाली रोशनी देख लेता है लेकिन जिस व्यक्ति की मौत होने वाली हो वह या तो इन सब की रोशनी को नहीं महसूस कर पाता या फिर ये सब उसे लाल रंग का नजर आता है।जिस व्यक्ति की मौत कुछ ही घंटों में होने वाली होती है उसे चांद में दरार या खंडित चांद नजर आता है।जब हम अपने दोनों कान अपने हाथों से बंद कर लेते हैं तो हमें एक अजीब सा शोर सुनाई देता है लेकिन जिस व्यक्ति की मौत होने वाली हो उसके साथ ऐसा नहीं होता क्योंकि जब वो अपने कान बंद करता है तो उसके लिए सिर्फ और सिर्फ सन्नाटा होता है।जिस इंसान की मृत्यु नजदीक होती है उसे हर समय अपने मृत परिजनों के साथ होने का एहसास होता है। यह एहसास इतना गहरा होता है कि उसे ये लगता है कि वह उन्हीं के साथ रह रहा है।मौत के 2-3 दिन रह जाने पर उस व्यक्ति को अपने साथ हर समय एक साये के होने का एहसास होता है।जीभ का सूजना और मसूड़ों में से पस के निकलने को भी मृत्यु का एक बड़ा लक्षण माना जाता है।आसमान में चमकने वाले करोड़ो तारों के बीच एक ध्रुव तारा भी मौजूद होता है, जिसे ना देख पाने वाले की 6 महीने के भीतर मौत होने की संभावना रहती है।मौत से कुछ समय पहले व्यक्ति के शरीर में से एक अजीब सी गंध आने लगती है। यह गंध किस तरह की होती है यह कभी स्पष्ट नहीं हो पाया लेकिन मृत्यु गंध नाम से जाने जानी वाली यह गंध एक विशिष्ट प्रकार की होती है।सपने में उल्लू या एक उजड़े हुए गांव को देखने का अर्थ है कि उस व्यक्ति की मौत नजदीक है।जब किसी व्यक्ति को हर जगह आग का भ्रम होने लगता है तो इसका अर्थ स्पष्ट है कि उसकी मौत निकट है।हम जब शीशा देखते हैं तो हमें अपना ही चेहरा नजर आता है लेकिन अगर किसी को अपने अलावा किसी और का चेहरा नजर आने लगे तो यह 24 घंटों के भीतर उसकी मौत का संकेत देता है।
कहते हैं जन्म के साथ ही व्यक्ति का अंत भी निश्चित हो जाता है। उसकी मौत कैसे होगी, कब होगी, कहां होगी आदि सभी का निर्णय पहले ही हो जाता है।लेकिन फिर भी मनुष्य की चिंता इसी बात पर स्थिर रहती है कि कहीं उसे या उसके परिजन को कुछ हो तो नहीं जाएगा। जिस तरह जीवन एक सत्य है उतना ही बड़ा सच है जीवन के पश्चात मौत।लेकिन फिर भी मनुष्य की चिंता इसी बात पर स्थिर रहती है कि कहीं उसे या उसके परिजन को कुछ हो तो नहीं जाएगा। जिस तरह जीवन एक सत्य है उतना ही बड़ा सच है जीवन के पश्चात मौत।व्यक्ति चाहे कितना ही ताकतवर, धनवान या ऊंचे ओहदे पर हो, कभी अपनी मौत को धोखा नहीं दे सकता। इस परिवर्तनशील दुनिया में हर पल व्यक्ति का स्वभाव, उसकी आकांक्षाएं, उसकी प्राथमिकताएं बदलती जा रही हैं और जाहिर है बदलते समय के साथ-साथ इस बदलाव में और भी तेजी आएगी।परंतु जीवन का मौत का चक्र ना कभी बदला है और ना कभी बदलेगा। जिसने जन्म लिया है उसे एक दिन इस भौतिक संसार को अलविदा कहना ही है। हां, मृत्यु के पश्चात आत्मा कहां जाती है, पुनर्जन्म लेकर दोबारा इस संसार का रुख करती है या नहीं, ये अभी एक पहेली ही है।इंसान को कभी नहीं पता चलता कि उसका अंत कितना नजदीक है लेकिन पुराणों के अनुसार भगवान शिव ने स्वयं कुछ ऐसे लक्षणों को बताया है जो मृत्यु के नजदीक होने जैसी बात को स्पष्ट करते हैं।मान्यताओं के अनुसार जब व्यक्ति के चेहरे का रंग पीला, सफेद या हल्का लाल पड़ने लगता है तो ये इस बात का लक्षण है कि 6 महीने के भीतर उसकी मौत निश्चित है।सामान्य तौर पर जब हम तेल या पानी में झांकते हैं तो हमें उसमें अपना अक्स नजर आने लगता है लेकिन जिस व्यक्ति की मौत नजदीक है उसे वह अक्स नजर नहीं आता।पानी और तेल के साथ-साथ शीशे और धूप में भी उसकी परछाई उसका साथ छोड़ जाती है। इसका अर्थ है आगामी 6 महीनों के भीतर उसकी आत्मा उसका शरीर त्याग देगी।मौत से कुछ समय पहले व्यक्ति को सब चीज काली नजर आने लगती है। वह रंगों के बीच अंतर करना बंद कर देता है, उसे सब कुछ काला ही नजर आने लगता है।वैसे इस लक्षण को पुख्ता तौर पर मान्य नहीं कहा जा सकता लेकिन ऐसा माना जाता है कि जिस व्यक्ति का बायां हाथ लगातार एक सप्ताह तक फड़कता रहता है तो यह इस बात को सिद्ध करता है कि एक माह के भीतर उस व्यक्ति की मौत हो जाएगी।मनुष्य के पास पांच सेंस ऑर्गन अर्थात इन्द्रियां होती हैं लेकिन अगर धीरे-धीरे उन इन्द्रियों में कड़ापन आने लगे तो यह उस व्यक्ति की मौत को स्पष्ट करता है।समय जैसे-जैसे बीतता है वह व्यक्ति अपनी नाक को नहीं देख पाता। सामान्य तौर पर धुंधला ही सही लेकिन हम अपनी नाक को देख सकते हैं लेकिन जिस व्यक्ति की मौत होने वाली होती है उसकी आंखें ऊपर की ओर मुड़ने लगती हैं जिसकी वजह से वह अपनी नाक नहीं देख पाता।सामान्य व्यक्ति सूरज, चांद और आग में से निकलने वाली रोशनी देख लेता है लेकिन जिस व्यक्ति की मौत होने वाली हो वह या तो इन सब की रोशनी को नहीं महसूस कर पाता या फिर ये सब उसे लाल रंग का नजर आता है।जिस व्यक्ति की मौत कुछ ही घंटों में होने वाली होती है उसे चांद में दरार या खंडित चांद नजर आता है।जब हम अपने दोनों कान अपने हाथों से बंद कर लेते हैं तो हमें एक अजीब सा शोर सुनाई देता है लेकिन जिस व्यक्ति की मौत होने वाली हो उसके साथ ऐसा नहीं होता क्योंकि जब वो अपने कान बंद करता है तो उसके लिए सिर्फ और सिर्फ सन्नाटा होता है।जिस इंसान की मृत्यु नजदीक होती है उसे हर समय अपने मृत परिजनों के साथ होने का एहसास होता है। यह एहसास इतना गहरा होता है कि उसे ये लगता है कि वह उन्हीं के साथ रह रहा है।मौत के 2-3 दिन रह जाने पर उस व्यक्ति को अपने साथ हर समय एक साये के होने का एहसास होता है।जीभ का सूजना और मसूड़ों में से पस के निकलने को भी मृत्यु का एक बड़ा लक्षण माना जाता है।आसमान में चमकने वाले करोड़ो तारों के बीच एक ध्रुव तारा भी मौजूद होता है, जिसे ना देख पाने वाले की 6 महीने के भीतर मौत होने की संभावना रहती है।मौत से कुछ समय पहले व्यक्ति के शरीर में से एक अजीब सी गंध आने लगती है। यह गंध किस तरह की होती है यह कभी स्पष्ट नहीं हो पाया लेकिन मृत्यु गंध नाम से जाने जानी वाली यह गंध एक विशिष्ट प्रकार की होती है।सपने में उल्लू या एक उजड़े हुए गांव को देखने का अर्थ है कि उस व्यक्ति की मौत नजदीक है।जब किसी व्यक्ति को हर जगह आग का भ्रम होने लगता है तो इसका अर्थ स्पष्ट है कि उसकी मौत निकट है।हम जब शीशा देखते हैं तो हमें अपना ही चेहरा नजर आता है लेकिन अगर किसी को अपने अलावा किसी और का चेहरा नजर आने लगे तो यह 24 घंटों के भीतर उसकी मौत का संकेत देता है।